Tuesday, 31 January 2017

ABP न्यूज के सर्वे में यूपी को भाया हाथ का साथ, गठबंधन बहुमत के करीब


यूपी की सियासत में पल-पल बदलते समीकरनो के साथ सियासी दंगल जारी है. इस दंगल में कौन किस पर भारी है यह बताने के लिए एबीपी न्यूज-लोकनीति-सीएसडीएस ने सर्वे किया है. सर्वे के मुताबिक एसपी और कांग्रेस गठबंधन सबसे मजबूत हैं. गठबंधन का यह निर्णय सूबे के सीएम को ‘सुल्तान’ बना रहा है. सीएम अखिलेश यादव की लोकप्रियता में मामूली गिरावट आयी है लेकिन इसके बावजूद गठबंधन की वजह से वह सत्ता के करीब आते दिख रहे हैं.
समाजवादी पार्टी के झगड़े में अखिलेश यादव सुप्रीम बनकर उभरे और उन्होंने कांग्रेस से गठबंधन किया है. अब टक्कर में हैं समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन, बीजेपी और बीएसपी. बड़ा सवाल ये है कि समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन कमाल करेगा? बीजेपी इस गठबंधन के बाद भी जीत पाएगी? बीएसपी अकेले ल़ड़कर भी 5 साल बाद सत्ता में वापसी कर पाएगी?
सीएम की पहली पंसद कौन ?
एबीपी न्यूज-लोकनीति-सीएसडीएस के ओपिनियन पोल में सीएम अखिलेश यादव की लोकप्रियता को लेकर वोटरों की राय पूछी गई. अखिलेश की लोकप्रियता में दो फीसदी की गिरावट आई है. दिसंबर में भी हमने ओपिनियन पोल में वोटरों से सीएम की पहली पसंद पूछी थी. दिसंबर में 28 फीसदी की पसंद अखिलेश थे लेकिन जनवरी में इसी सवाल पर अखिलेश 26 फीसदी वोटरों की पसंद बने. यानी महीने भर में दो फीसदी लोकप्रियता घटी अखिलेश की. हालांकि ये गिरावट मामूली ही कही जाएगी. मायावती जहां थी वहीं हैं.

लोग किससे ज्यादा संतुष्ट हैं?
सर्वे के मुताबिक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों से लोग संतुष्ट हैं. सर्वे की मानें तो प्रधानमंत्री के रूप में मोदी और मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश से संतुष्ट लोगों की प्रतिशत समान है.
एसपी-कांग्रेस गठबंधन से फायदा किसको?
जब इस सवाल का जवाब आम लोगों से पूछा गया तो अधिकांश लोग कन्फ्यूज दिखे. इस पर कोई स्पष्ट राय नहीं दिखी. करीब 43 प्रतिशत लोगों ने इस पर अपनी कोई राय ही नहीं दी. लेकिन 37 प्रतिशत लोगों ने एसपी को फायदा बताया.

किस इलाके में किसका दबदबा?
सर्वे के मुताबिक एसपी-कांग्रेस गठबंधन के बाद सपा गठबंधन के वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ है. पुर्वांचल की 142 सीटों की बात करें तो एसपी गठबंधन को 33 प्रतिशत, बीजेपी गठबंधन को 27 प्रतिशत, बीएसपी को 22 प्रतिशत और अन्य दलों को 18 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिलने की संभावना है. रोहिलखंड और पश्चिम यूपी की 96 सीटों में एसपी गठबंधन को 37 प्रतिशत, बीजेपी गठबंधन को 30 प्रतिशत, बीएसपी को 18 प्रतिशत लोगों और अन्य दलों को 15 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिल सकता है.

दोआब-बुंदेलखंड की 92 सीटों में भी सपा गठबंधन आगे दिख रहा है. सर्वे की माने तो एसपी गठबंधन को 34 प्रतिशत, बीजेपी को 27 प्रतिशत तो बीएसपी को 29 प्रतिशत और अन्य दलों को 10 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिल रहा है. अवध की 73 सीटों में भी एसपी गठबंधन सबसे आगे है लेकिन बीजेपी से कड़ी टक्कर है. एसपी गठबंधन को 38 प्रतिशत, बीजेपी को 35 प्रतिशत, बीएसपी को 27 प्रतिशत और अन्य को एक प्रतिशत समर्थन मिलने की संभावना है.
युवाओं के बीच लोकप्रिय कौन?
सर्वे के मुताबिक 18 से 25 वर्ष के युवाओं के बीच एसपी गठबंधन सर्वाधिक लोकप्रिय है. युवा एसपी गठबंधन को 38 प्रतिशत, बीजेपी गठबंधन को 31 प्रतिशत तो बीएसपी को 23 प्रतिशत पसंद कर रहे हैं. 26 से 45 वर्ष के लोगों के बीच भी एसपी गठबंधन सर्वाधिक लोकप्रिय है. एसपी गठबंधन को 33 प्रतिशत, बीजेपी गठबंधन को 28 प्रतिशत तो बीएसपी को 23 प्रतिशत पसंद कर रहे हैं.
गांव और शहर में किसको मिल रही है बढ़त?
सर्वे की माने तो यूपी के गांव की 308 सीटों पर भी एसपी गठबंधन को बढ़त हासिल है. करीब 35 प्रतिशत लोग एसपी गठबंधन के हिस्से जा रहे हैं 27 प्रतिशत बीजेपी को अपना समर्थन जता रहे हैं. 24 प्रतिशत लोग बीएसपी पर अपना भरोसा जता रहे हैं. शहरों में एसपी गठबंधन को बीजेपी गठबंधन की तरफ से जोरदार टक्कर मिल रही है. शहरों में एसपी गठबंधन को 35 प्रतिशत तो बीजेपी गठबंधन को भी 35 प्रतिशत समर्थन मिलने की संभावना है. बीएसपी को यहां नुकसान हो रही है. बीएसपी को महज 19 प्रतिशत समर्थन मिलता दिख रहा है.
नोटबंदी कैसा निर्णय?
सर्वे के मुताबिक नोटबंदी को 41 प्रतिशत लोगों ने सही फैसला बताया है. दिसंबर में किये गये सर्वे में 35 प्रतिशत लोगों ने इस फैसले को सही बताया था.
किस दल को किस समुदाय का समर्थन ?
सर्वे के मुताबिक बीजेपी को सवर्णों का पूरा समर्थन मिल रहा है. एसपी गठबंधन को यादव और मुस्लिम का भरपूर समर्थन प्राप्त है. दलितों में बीएसपी का क्रेज बरकरार है.

किस दल को कितना वोट शेयर?
सर्वे के मुताबिक एसपी गठबंधन को 35 प्रतिशत, बीजेपी गठबंधन को 29 प्रतिशत, बीएसपी को 23 प्रतिशत और अन्य दलों को 13 लोगों का समर्थन मिल रहा है.
किस दल को कितनी सीटें?
राजीव करंदीकर देश के सबसे बड़े गणित संस्थान चेन्नई गणितीय संस्थान के निदेशक हैं. हम आपको बता दें कि सीएसडीएस ने वोटरों से बात करके जो आंकड़े जुटाए उसके प्रतिशत को सीटों में राजीव करंदीकर ने तब्दील किया है. राजीव करंदीकर के मुताबिक एसपी गठबंधन को 187 से 197 सीटें मिलने की संभावना है. बीजेपी गठबंधन को 118 से 128 सीटें तो बीएसपी के हिस्से 76 से 86 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है. अन्य को 5 से 9 सीट मिल सकती है.

कैसे हुआ सर्वे?
एबीपी न्यूज-लोकनीति-सीएसडीएस ने 17 से 23 जनवरी के बीच यूपी के लोगों की राय ली. एबीपी न्यूज और लोकनीति-सीएसडीएस ने यूपी की 65 विधानसभा क्षेत्रों के 6 हजार 481 लोगों से बात की. यह सर्वे यूरोपियन सोसाइटी फॉर ओपिनियन एंड मार्केटिंग रिसर्च यानी ESOMAR के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए किया गया.

Sunday, 29 January 2017

राहुल-अखिलेश के लिए बना विशेष रथ





 अखिलेश यादव और राहुल गांधी के रोड शो के लिए विशेष प्रकार का रथ तैयार कराया गया है जिसमें दोनों नेताओं के रणनीतिकारों की तस्वीरें होंगी।
शहर के प्रमुख चौराहों से गुजरेगा कारवां
हजरतगंज के जीपीओ पार्क स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद यह रथ हजरतगंज से मेफेयर चौराहे से घूमकर लालबाग में नावेल्टी चौराहा तक पहुंचेगा। वहां से कैसरबाग, (नजीराबाद होते हुए) अमीनाबाद की राह पुराने लखनऊ पहुंचेगा। फिर नक्खास से चौक चौराहे होते हुए रथ पर सवार दोनों नेता घंटाघर पहुंचेंगे जहां रोड शो का समापन होगा।
दोनों दलों के लोग जुटा रहे भीड़
इस पूरी यात्रा की कामयाबी के लिए निशवार को समाजवादी पार्टी की युवा ब्रिगेड मुस्तैद रही। एमएलसी एसआरएस यादव के नेतृत्व में युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास यादव, मनीष सिंह, मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के एबाद, नगर अध्यक्ष फाकिर सिद्दीकी ने रोड शो मार्ग पर घूम कर इंतजाम दुरुस्त कराया। मंत्री राजेन्द्र चौधरी के साथ मंत्रणा की। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रतिनिधि के रूप में केएल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने रोड शो मार्ग का अवलोकन किया और कांग्रेसियों को रोड शो के दौरान मौजूद रहने की हिदायत दी।
शक्ति प्रदर्शन भी होगा
यूं तो यह शो नए राजनीतिक गठजोड़ और सरकार बनाने के साझा प्रयासों का इजहार करने के लिए है, मगर इस रोड शो में भी सपा व कांग्रेस अपने समर्थकों की ज्यादा से ज्यादा भीड़ दिखाकर लखनऊ में अपनी पकड़ का एहसास भी कराएंगे। सपा के प्रदेश अध्यक्ष ने समर्थकों व कार्यकर्ताओं को रोड शो में मौजूद करने के लिए कहा है। वहीं कांग्रेस ने रोड शो में अपने समर्थकों की भीड़ जुटाने के लिए दिन भर मंथन किया है।
यूपी को यह साथ पसंद है
रोड शो में कांग्रेस-सपा का नया प्रचार गीत ‘यूपी को यह साथ पसंद है’ भी बजेगा। गाने से जुड़े पोस्टर जारी होंगे। दो मिनट के गाने में राहुल-अखिलेश को युवा नेता बताने के साथ उनके काम गिनाए जाएंगे। कांग्रेस की ओर से ‘यूपी के अपने लड़के बनाम बाहरी मोदी’ भी तैयार किया गया है।

Friday, 27 January 2017

अब 'यूपी को यह साथ पसंद है'


  सपा-कांग्रेस गठबंधन के बाद यूपी के चुनावी दंगल में साथ उतर रही सपा की साइकिल  और कांग्रेसी पंजा 29 जनवरी से एक दूसरे के साथ चलेंगे। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष 29 जनवरी को लखनऊ में संयुक्त रोड शो करेंगे। इस दौरान गठबंधन के बाद दोनों पार्टियों के लिए बना 'यूपी को यह साथ पसंद है' स्लोगन लॉन्च किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक टीम पीके की ओर से तैयार स्लोगन को दोनों खेमे से मंजूरी मिल गई है। इससे पहले राहुल और अखिलेश को लेकर यूपी के लड़के और बाहरी मोदी स्लोगन भी तैयार किया गया था। शुक्रवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं की बुलाई बैठक में 29 तारीख की तैयारियों में जुटने के निर्देश दिए। पार्टी ऑफिस पर बुलाई गई बैठक में सीएम ने कहा कि जहां-जहां कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, उन्हें सपा कार्यकर्ता पूरा सहयोग करें।
गाना भी होगा तैयार
सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव की ओर से इस नारे को ओवरप्ले नहीं करने की हिदायत दी गई है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि अखिलेश सपा के लिए ‘गंभीर राजनेता’ और ‘काम बोलता है’ जैसे स्लोगन के साथ उतरे हैं। वहीं सूत्रों के अनुसार इस स्लोगन के साथ दो मिनट का एक गीत भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें राहुल और अखिलेश की जोड़ी को यूपी के लिए फिट बताया जाएगा।
बैठक में मौजूद रही अपर्णा
कार्यकर्ताओं से शुक्रवार को बैठक के दौरान सीएम ने पांच साल की सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और कहा इन कामों के आधार पर ही कार्यकर्ता जनता के बीच जाएं। साथ ही उन्होंने केन्द्र की ढ़ाई साल की नाकामियों को भी जनता के बीच पहुंचाने को कहा। सपा के नगर संगठन से जुड़े नेताओं ने बताया कि विधानसभा चुनाव में पार्टी का घोषणा पत्र लेकर जन संपर्क किया जाएगा। वहीं बैठक में लखनऊ कैंट से सपा की घोषित प्रत्याशी अर्पणा यादव भी बैठक में मौजूद रहीं।
इन्हें सौपी गई प्रचार की जिम्मेदारी
सपा सरकार और पार्टी के उम्मीदवारों के प्रचार के लिए मौजूदा और पूर्व पार्षद, नगर कमिटी, संचालन समिति, नगर संगठन के सभी पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।

Thursday, 26 January 2017

युवा हैं अखिलेश के साथ

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंंत्री अखिलेश अपनी युवा सोच की वजह से देशभर में पहचाने जाते है। वो खुद भी युुवा है इसलिए युवाओं को किस तरह आगे बढ़ाना है, इस बात को वो बखूूबी जानतेे है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्‍होने सबसे ज्‍यादा ध्‍यान युवाओं पर ही दिया है। लैपटॉप वितरण जैैसी तमाम योजनाओं ने उत्‍तर प्रदेश के युवाओं को काफी फायदा पहुॅचाया है।
गौरतलब है कि उत्‍तर प्रदेश में 2017 में विधानसभा चुनाव होने वाले है। अपने कार्यकाल के दौरान अखिेलश यादव ने व्‍यक्तिगत तौर पर युवाओं के बीच अपनी खास पहचान बना ली है। जिससे प्रदेश के युवा अखिलेश के तरफ आकर्षित हैं. युवाओं का कहना है कि अखिलेश सरकार ने प्रदेश में काफी विकास किया है. हम उनको दोबारा से जिताकर प्रदेश का सीएम बनाएगें.

Tuesday, 24 January 2017

डिंपल यादव प्रियंका गाँधी एक साथ करेंगी चुनाव प्रचार



  उत्तर प्रदेश के चुनावी घमासान में एक नया फैक्टर जुड़ गया है. वो फैक्टर है प्रियंका गांधी और डिंपल यादव की जोड़ी के ग्लैमर का. 
 
 इन दोनों की छवि ग्लैमरस रही हैं प्रियंका पहले भी चुनाव प्रचार करती रहीं लेकिन केवल अमेठी और रायबरेली तक, और डिंपल भी अपने इलाके तक सीमित थीं. लेकिन अब दोनों बाहर निकल कर एक साथ प्रचार करेंगी तो इससे गठबंधन को फ़ायदा होने वाला है.

  समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन के प्रचार में अखिलेश-राहुल, जितनी भूमिका प्रियंका गांधी-डिंपल यादव की होने वाली है. इसका संकेत गठबंधन की घोषणा के दौरान राज बब्बर के एलायंस के एजेंडे की घोषणा वाले बयान से लगाया जा सकता है, जिसमें महिला सुरक्षा और उनसे जुड़े मुद्दों को अहमियत दी गई है."

Sunday, 22 January 2017

समाजवादी पार्टी का घोषणा पत्र हुआ जारी, मेट्रो, हाइवे, स्मार्टफोन समेत विकास पर जोर

विकास से विजय की ओर के वादे के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को समाजवादी पार्टी का घोषणा पत्र जारी कर दिया. इसमें उन्होंने 2012 के चुनावी वादों को पूरा करने के साथ आगे की योजनाओं का ऐलान किया. उन्होंने आगरा, कानपुर और वाराणसी में मेट्रो चलाने का वादा किया. लैपटॉप की तर्ज पर स्मार्ट फोन देने की भी बात की. आखिर क्या है खास इस घोषणापत्र में डालते है इस पर एक नज़र।
सपा के चुनावी घोषणा पत्र की अहम बातें...
- करोड़ लोगों को हजार रुपये मासिक पेंशन
- स्मार्टफोन देने का वादा
-अल्पसंख्यकों के लिए कौशल विकास योजना
-गरीब महिलाओं को प्रेशर कुकर देने का वादा
-मजदूरों को रियायती दर पर मिड-डे मील
-पूर्वांचल में स्किल डेवलेपमेंट बनाने का वादा, स्टार्ट-अप योजना
-वरिष्ठ नागरिकों के लिए ओल्ड ऐज होम बनाने का वादा
-महिलाओं का रोडवेज में आधा किराया लगेगा
-पशुओं के इलाज के लिए एंबुलेंस की सुविधा, 108 की सेवा
-गांव में एंबुलेंस के साथ पहुंचेगा डॉक्टर
-कुपोषित बच्चों को 1 किलो घी, 1 किलो मिल्क पाउडर दिया जाएगा
-शहर की तरह गांव में भी 24 घंटे बिजली
-समाजवादी किसान कोष बनाएंगे
- जिला मुख्यालय फोर-लेन से जोड़ेंगे

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तहसील स्तर पर एसेंबली बाजार बनाने का काम.

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संविदा कर्माचारियों की समस्याओं का समाधान.

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कमजोर बच्चों, गरीब बच्चों को एक लीटर घी, एक किलो मिल्क पाउडर.

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शहर की तरह गांवों में 24 घंटे बिजली.

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ग्रीन फिल्ड टाउनशिप का निर्माण होगा.
फिर सरकार बनाएंगे- अखिलेश
इस मौके पर अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ने बहुत काम किया है. हम दोबारा सरकार बनाएंगे. मुझे सबसे कम उम्र में सीएम बनने का मौका मिला. समाजवादी सरकार पर लोगों को भरोसा है. हम अपने सिद्धांतों से नहीं हटेंगे.

अखिलेश ने पूछा- अच्छे दिन वाले कहां गए?
अखिलेश ने कहा कि न जाने कौन कौन सी बातें न जाने कौन से सपने दिखाए जा रहे हैं. लोग समीकरण बना रहे हैं कि ये समीकरण बनेगा तो ये होगा. तमाम दल हैं जिनके पास बताने को कुछ नहीं है. जिन्होंने नारा दिया अच्छे दिन का, सबका साथ-सबका विकास, अब तो तीन साल हो गए. बजट में यूपी के लिए कुछ अच्छी चीज दे सकते हैं लेकिन देश की जनता पूछ रही है कि अच्छे दिन कहा हैं. विकास के बहाने झाड़ू पकड़ा दिया, योग करा दिया. यूपी का कोई जिला नहीं बचा जहां काम नहीं होगा. याद करो पांच साल पहले बिजली कितने जिलों, गांवों में आती थी. गांव में 16-18 घंटे बिजली पहुंचाई है.
'गाजीपुर-बलिया तक बनाएंगे सड़क' अखिलेश ने कहा कि सड़क पर चलो तो पता लगता है कि सड़क कैसी है. लखनऊ-आगरा तक सड़क बन गई है. अब ऐसी ही सड़क गाजीपुर-बलिया तक बनवाएंगे. सड़कों के किनारे मंडी भी बनवा रहे हैं.
मायावती पर निशाना, कहां गयी पत्थर वाली सरकार
पत्थर वाली सरकार कितने काम गिनाएगी? बहुत टीवी पर आ रही है, सोचो टीवी अगर टकरा गया पत्थरों से क्या होगा टीवी का? जो पत्थर लगे हैं नोएडा, लखनऊ में वे इंतजार कर रहे हैं. वो इससे बड़े हाथी बना देंगे. महाराष्ट्र से कंप्टीशन का मौका मिल गया तो फिर अगर वो बनाने लगी तो कितना सरकारी खजाना खाली होगा.

Saturday, 21 January 2017

अखिलेश ने बदली यूपी की तस्वीर



उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी की तस्वीर बदल कर रख दी है। अखिलेश सरकार ने पिछले चार वर्षो के दौरान काफी काम किए हैं। आगरा-एक्सप्रेस वे का काम रिकॉर्ड समय दो वर्ष में पूरा हुआ। तो वही दूसरी ओर यूपी की राजधानी लखनऊ की बात करें तो मेट्रो  को लाकर सीएम अखिलेश ने लखनऊ वासियों को बहुत बड़ा तोहफा दिया है। साथ ही साथ लखनऊ में अंतराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम , गोमती रिवर फ्रंट, आईटी सिटी, जनेश्वर मिश्र पार्क बनाकर यूपी को नई सौगात दी है। शिक्षा के क्षेत्र में मेधावी छात्रों को मुफ्त लैपटॅाप , छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए कन्या विद्याधन देकर उनका हौसला बढ़ाने का काम अखिलेश सरकार ने किया है। समाजवादी एम्बुलेंस, समाजवादी पेंशन योजना, यूपी 100, महिला सशक्तीकरण को लेकर 1090, आदि बहुत सारी योजना अखिलेश यादव ने चलाई है. सपा सरकार के इस विकास का कोई मुकाबला नहीं कर सकता. इतने कम समय में अब तक किसी भी सरकार ने इतनी तेजी से विकास नहीं किया है।

Thursday, 19 January 2017

आदर्शवादी पुत्र सीएम अखिलेश यादव



युवाओं के नायक सीएम अखिलेश यादव आदर्श नेता के साथ साथ एक आदर्शवादी पुत्र होने का भी परिचय दिया है। 
इलेक्शन सिंबल पर फैसला आने के बाद सबसे पहले अखिलेश यादव  पिता मुलायम से मिलने गए । इस दौरान अखिलेश यादव ने चुनाव में पार्टी की जीत के लिए पिता से आशीर्वाद लिया।
 एक तरफ जहां समाजवादी कार्यकर्ता जीत का जश्न मना रहे थे, तभी सीएम अखिलेश ने कहा कि वो इस जीत से खुश नही हैं। लेकिन ये लड़ाई जरूरी थी। 

पिता से मेरा कोई नही बदल सकता । उन्होने ने कहा कि साईकिल चलती रहेगी और बढ़ती रहेगी । अखिलेश ने हमेशा पिता मुलायम का सम्मान किया है।