यूपी के
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मां अब इस दुनिया में
नहीं हैं, जिसको खोने के दर्द का अहसास उन्हें हमेशा रहता है। इसीलिए मुख्यमंत्री ने यूपी में
मां केंद्रित योजनाओं को प्राथमिकता दी है। समाजवादी
पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना हो या समाजवादी श्रवण यात्रा अखिलेश सरकार
के इन तोहफों ने राजधानी से सुदूर बैठी मां के चेहरे पर चमक और ओठों पर मुस्कान बिखेरने का काम किया है।
अखिलेश के जीवन
में मां का महत्व
समाजवादी पेंशन योजना में परिवार की महिला मुखिया
के खाते मे सीधे पैसा देकर उन्हें आर्थिक रूप
से मजबूत करने का काम किया। समाजवादी श्रवण यात्रा में परिवार के बुर्जुग माता-पिता जो अभी तक आर्थिक संसाधनों की
तंगी के कारण तीर्थ यात्रा के लिए मन मसोस कर रह गए थे, उनको सरकारी खर्चे पर तीर्थ यात्रा करा कर उनके जीवन को सार्थक कर
दिया। यूपी जैसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश की विनम्रता और संवेदनात्मक पहुलुओं को कोई चुनौती नहीं दे सकता। आजतक उनकी विनम्रता, सहजता और सहनशीलता को लेकर कोई सवाल नहीं उठा तो निश्चितही इसके पीछे
उनकी मां का बड़ा योगदान रहा होगा।
श्रवण यात्रा के
बाद आंखों से छलक उठे आंसू
शिरडी और शनि शिंगणापुर के दर्शन करके शनिवार
को लौटी एक 65 साल की बुजुर्ग महिला से जब बात की गई तो उनकी आंखों से आंसू छलक उठे। यह
उनके लिए खुशी का मौका था। इस बुजुर्ग महिला का शिरडी
दर्शन करने की बहुत पहले से ही इच्छा थी, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों का
निर्वहन और आर्थिक तंगी की वजह से वो अपना यह सपना पूरा नहीं कर पा रहीं थी। एक महीने पहले जब उन्हें पता चला कि बेटे बहू भी शिरडी घूमने की तैयारी कर
रहे हैं तो उन्हें खुशी का अहसास हुआ।
उन्हें लगा शायद उनकी बरसों पुरानी शिरडी घूमने की मन्नत अब पूरी हो जाएगी। लेकिन उनकी उम्मीदों को तब झटका
लगा जब उनके बेटा-बहू उन्हें साथ लिए बिना ही शिरडी घूमने चले गए। उन्हें विश्वास हो चला था कि शायद अब इस जीवन में उनकी शिरडी जाने की इच्छा पूरी
नहीं हो पाएगी। उनके इस दर्द को समझा पड़ोस में रहने वाली अंकिता नाम की एक युवती ने। अंकिता ने ‘समाजवादी श्रवण यात्रा’ में उनका नामांकन करा दिया। फिर क्या था
शानदार आवभगत के साथ उनका चारबाग रेलवे
स्टेशन पर स्वागत किया गया। फिर एक स्पेशल ट्रेन में पूरे वी.आई.पी. इंतजामों के साथ उन्हें शिरडी सहित अनेक
तीर्थस्थानों की यात्रा कराई गई।
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